औद्योगिक रणनीति को नई दिशा दे रहे डॉ अमित अग्रवाल, पहले ही दिन 1.10 लाख करोड़ के एमओयू
Dr. Amit Agarwal steers industrial strategy
चंडीगढ़: हरियाणा में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने और निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल तैयार करने में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की कोर टीम के अफसरों की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। इनमें उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के कमिश्नर एवं सचिव डॉ अमित कुमार अग्रवाल का नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आया है।
अपनी परिणामोन्मुख कार्यशैली, सटीक प्रशासनिक दक्षता और दूरदर्शी सोच के दम पर डॉ अमित अग्रवाल ने प्रदेश की औद्योगिक रणनीति को पूरी तरह नई दिशा दी है। पिछले लगभग एक वर्ष से उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की कमान संभाल रहे डॉ अग्रवाल ने सबसे पहले निवेश प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया। उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया, जिससे फाइलें महीनों की जगह दिनों में क्लियर होने लगीं।
इतना ही नहीं, डॉ अग्रवाल ने उद्योग जगत के दिग्गजों से लगातार संवाद कर उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नीतिगत सुधारों को भी तेज गति दी। MSME से लेकर बड़े उद्योग समूहों तक, सभी के लिए अलग-अलग विंडो बनाकर समस्याओं का मौके पर समाधान शुरू किया गया।
इन सभी प्रयासों का असर सोमवार को गुरुग्राम में साफ दिखाई दिया, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महत्वाकांक्षी ‘मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस नई नीति का लक्ष्य अगले 5 साल में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और 20 लाख से ज्यादा रोजगार पैदा करना है।
खास बात ये रही कि लॉन्च के पहले ही दिन इस नीति को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। देश-विदेश के विभिन्न औद्योगिक समूहों और बड़े निवेशकों के साथ मौके पर ही 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इसमें ऑटो, आईटी, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर की बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि यह हरियाणा के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी सिंगल-डे उपलब्धियों में से एक है। इस सफलता का श्रेय सीधे तौर पर डॉ अमित अग्रवाल की टीम की प्लानिंग और एग्जीक्यूशन को दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी मंच से डॉ अग्रवाल की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि अफसर जब जमीन पर उतरकर काम करते हैं तो नतीजे ऐसे ही आते हैं।